राज्यपाल ने कहा कि महात्मा गांधी सत्य को सर्वोच्च मानते थे और उनका सत्याग्रह अन्याय के खिलाफ अहिंसक एवं नैतिक प्रतिकार का दर्शन था। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के सादगीपूर्ण और राष्ट्र के प्रति समर्पित जीवन का भी उल्लेख किया।
संगोष्ठी में राज्यपाल ने इलेक्ट्रोपैथी को पौधों के अर्क पर आधारित चिकित्सा पद्धति बताते हुए कहा कि आयुर्वेद सभी चिकित्सा पद्धतियों की जननी है। उन्होंने भारतीय चिकित्सा परंपरा और प्राचीन ज्ञान की चर्चा करते हुए शोध एवं डेटा के महत्व पर भी जोर दिया।
राज्यपाल ने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़ा प्रसंग साझा करते हुए उनकी सादगी और ईमानदारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण और नैतिकता से प्रेरित था। उन्होंने गांधीजी के सत्याग्रह और अहिंसा की संस्कृति को देश की महत्वपूर्ण विरासत बताते हुए उनसे प्रेरणा लेने की अपील की।
हरिजन सेवक संघ, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव संजय राय ने मुख्य वक्ता के रूप में गांधी के जीवन दर्शन पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि व्यक्ति समय और नए संदर्भों के साथ अपने सत्य और समझ को बेहतर बनाने की प्रक्रिया में आगे बढ़ता है।
विधायक गोपाल शर्मा ने गांधी और शास्त्री के जीवन मूल्यों को अनुकरणीय बताते हुए सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, ईमानदारी और नैतिकता के संदेशों का उल्लेख किया।
कार्यक्रम में हेमन्त सेठिया ने इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा पद्धति से जुड़े आयोजकों के दृष्टिकोण और डेटा आधारित अनुसंधान की आवश्यकता पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके अनुसार यह हर्बल पद्धति है और इसके लाभों के आकलन के लिए डेटा के महत्व पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम से पहले राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़े प्रसंगों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
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