पानी के लिए विधायक का अनोखा विरोध: PHED दफ्तर में ही धरने पर बैठे रविंद्र सिंह भाटी, बोले– ‘लिखित आश्वासन के बिना नहीं उठूंगा’

बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र में पानी की किल्लत अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधे टकराव का रूप ले चुकी है। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा रहने से नाराज़ क्षेत्रीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया।

बुधवार को विधायक भाटी सीधे PHED प्रोजेक्ट ऑफिस पहुंचे और वहां एडिशनल चीफ इंजीनियर के चैंबर में ही धरने पर बैठ गए। उनका साफ कहना था कि जब तक विभाग लिखित रूप में समयसीमा के साथ पानी पहुंचाने का आश्वासन नहीं देगा, वे वहां से नहीं उठेंगे।


अधिकारियों के जवाब से भड़का आक्रोश

धरने से पहले विधायक भाटी ने अधिकारियों से यह जानना चाहा कि क्षेत्र में पानी कब तक पहुंचेगा। लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। अधिकारियों ने केवल इतना कहा कि “अतिरिक्त प्लान बनाकर सरकार को भेजा जाएगा”

इस टालमटोल भरे रवैये से विधायक भाटी का गुस्सा भड़क गया। उन्होंने मौके पर ही कहा कि जब जनता एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रही है, तब विभाग केवल फाइलों और योजनाओं की बात कर रहा है।


एक साल से जारी है पानी की समस्या

रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि वे पिछले एक साल से लगातार विभाग को पत्र लिख रहे हैं, लेकिन न तो पाइपलाइन का काम पूरा हुआ और न ही कोई वैकल्पिक जल व्यवस्था की गई। जल जीवन मिशन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गांवों तक पानी नहीं पहुंचा

उन्होंने कहा कि शिव क्षेत्र के लोग भीषण गर्मी और पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं, लेकिन विभाग की लापरवाही से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।


“आश्वासन नहीं, पानी चाहिए”

धरने के दौरान विधायक भाटी ने दो टूक कहा कि अब केवल मौखिक आश्वासन नहीं चलेगा।
उनकी मांग है कि:

  • पानी पहुंचाने की स्पष्ट समयसीमा लिखित में दी जाए

  • अधूरी पाइपलाइन का काम तुरंत पूरा किया जाए

  • जब तक काम पूरा नहीं होता, वैकल्पिक जल व्यवस्था की जाए

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने जल्द समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


निष्कर्ष:

बाड़मेर के शिव क्षेत्र में जल संकट ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का रूप ले लिया है। विधायक रविंद्र सिंह भाटी का PHED दफ्तर में धरना यह दिखाता है कि जनता की बुनियादी जरूरतों को लेकर असंतोष चरम पर है। अब देखना होगा कि विभाग कब तक ठोस कदम उठाकर क्षेत्र की प्यास बुझा पाता है, या यह आंदोलन और बड़ा रूप लेता है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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